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शायरी में ज़मान-ओ-मकान पर स्कॉलर

ग़ालिब का 'दश्त': एक अज़ीम शेरी अलामत (काव्यात्मक प्रतीक) का विश्लेषण

मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी में लफ़्ज़ 'दश्त' (रेगिस्तान/जंगल) महज़ एक इस्तिआरा (रूपक) नहीं, बल्कि समय, स्थान और इंसानी ज़ेहन की एक पेचीदा और गहरी अलामत (प्रतीक) है।

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