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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

बाग़ी पर शेर

चेहरा-ए-वक़्त तिरी पर्दा-कुशाई कर के

हम ने हर दौर में पल्टा है नसीब-ए-दौराँ

सबा नक़वी

चली है बाद-ए-मुख़ालिफ़ तो ग़म नहीं है कि हम

चराग़ अपने लहू से जलाने आए हैं

ज़किया ग़ज़ल

हमें ख़्वाह 'आम ही करना पड़े फ़ैज़ान-ए-मय-ख़ाना

मगर हम शैख़ को दुनिया को बहकाने नहीं देंगे

अमर अबदाबादी
बोलिए