चेहरा-ए-वक़्त तिरी पर्दा-कुशाई कर के
हम ने हर दौर में पल्टा है नसीब-ए-दौराँ
चली है बाद-ए-मुख़ालिफ़ तो ग़म नहीं है कि हम
चराग़ अपने लहू से जलाने आए हैं
हमें ख़्वाह 'आम ही करना पड़े फ़ैज़ान-ए-मय-ख़ाना
मगर हम शैख़ को दुनिया को बहकाने नहीं देंगे
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
चेहरा-ए-वक़्त तिरी पर्दा-कुशाई कर के
हम ने हर दौर में पल्टा है नसीब-ए-दौराँ
चली है बाद-ए-मुख़ालिफ़ तो ग़म नहीं है कि हम
चराग़ अपने लहू से जलाने आए हैं
हमें ख़्वाह 'आम ही करना पड़े फ़ैज़ान-ए-मय-ख़ाना
मगर हम शैख़ को दुनिया को बहकाने नहीं देंगे