तमन्ना पर शेर
इच्छा इंसान की स्वाभाविक
प्रवृति है । हर इंसान अपनी ज़िंदगी में कुछ न कुछ इच्छा रखता है । हमारे जीवन में दुख और हसरतों का एक बड़ा कारण हमारी तमन्नाएं हैं । हमारी इच्छा और आरज़ू अक्सर पूरी नहीं होतीं, लेकिन हम उस को पालते हैं । दर-अस्ल तमन्ना एक ऐसी ख़्वाहिश का नाम है जो ज़िंदगी के हर मरहले में किसी न किसी तरह से मौजूद रहती है । उर्दू शाइरी ने जीवन के इस तजरबे को बड़ी ख़ूबसूरती से पेश किया है । यहाँ तमन्ना-शाइरी के ख़ास रंगों का एक संकलन प्रस्तुत किया जा रहा है ।
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 5 अन्य
इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 1 अन्य
आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होते तक
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टैग्ज़ : इश्क़और 1 अन्य
आरज़ू है कि तू यहाँ आए
और फिर उम्र भर न जाए कहीं
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 4 अन्य
आग़ाज़-ए-मोहब्बत का अंजाम बस इतना है
जब दिल में तमन्ना थी अब दिल ही तमन्ना है
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टैग्ज़ : दिलऔर 1 अन्य
गँवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैं ने
वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने
हमारी ही तमन्ना क्यूँ करो तुम
तुम्हारी ही तमन्ना क्यूँ करें हम
सब ख़्वाहिशें पूरी हों 'फ़राज़' ऐसा नहीं है
जैसे कई अशआर मुकम्मल नहीं होते
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 1 अन्य
आगही कर्ब वफ़ा सब्र तमन्ना एहसास
मेरे ही सीने में उतरे हैं ये ख़ंजर सारे
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टैग्ज़ : आगहीऔर 3 अन्य
तुझ से किस तरह मैं इज़हार-ए-तमन्ना करता
लफ़्ज़ सूझा तो मआ'नी ने बग़ावत कर दी
ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक़, रिश्ते
जान ले लेते हैं आख़िर ये सहारे सारे
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 3 अन्य
तमन्नाओं में उलझाया गया हूँ
खिलौने दे के बहलाया गया हूँ
बाक़ी है अब भी तर्क-ए-तमन्ना की आरज़ू
क्यूँकर कहूँ कि कोई तमन्ना नहीं मुझे
कटती है आरज़ू के सहारे पे ज़िंदगी
कैसे कहूँ किसी की तमन्ना न चाहिए
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 2 अन्य
मैं आ गया हूँ वहाँ तक तिरी तमन्ना में
जहाँ से कोई भी इम्कान-ए-वापसी न रहे
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टैग्ज़ : इश्क़और 2 अन्य
आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 3 अन्य
ज़िंदगी क्या जो बसर हो चैन से
दिल में थोड़ी सी तमन्ना चाहिए
दिल में वो भीड़ है कि ज़रा भी नहीं जगह
आप आइए मगर कोई अरमाँ निकाल के
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 2 अन्य
तमन्ना तिरी है अगर है तमन्ना
तिरी आरज़ू है अगर आरज़ू है
अरमान वस्ल का मिरी नज़रों से ताड़ के
पहले ही से वो बैठ गए मुँह बिगाड़ के
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 2 अन्य
बाद मरने के भी छोड़ी न रिफ़ाक़त मेरी
मेरी तुर्बत से लगी बैठी है हसरत मेरी
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 1 अन्य
हम न मानेंगे ख़मोशी है तमन्ना का मिज़ाज
हाँ भरी बज़्म में वो बोल न पाई होगी
ख़्वाहिशों ने डुबो दिया दिल को
वर्ना ये बहर-ए-बे-कराँ होता
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 2 अन्य
हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का
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टैग्ज़ : ग़मऔर 3 अन्य
एक भी ख़्वाहिश के हाथों में न मेहंदी लग सकी
मेरे जज़्बों में न दूल्हा बन सका अब तक कोई
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 1 अन्य
मिरे सारे बदन पर दूरियों की ख़ाक बिखरी है
तुम्हारे साथ मिल कर ख़ुद को धोना चाहता हूँ मैं
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टैग्ज़ : लवऔर 1 अन्य
यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले
आज क्यूँ दिल में छुपी बैठी है हसरत मेरी
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 1 अन्य
जीने वालों से कहो कोई तमन्ना ढूँडें
हम तो आसूदा-ए-मंज़िल हैं हमारा क्या है
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टैग्ज़ : आरज़ूऔर 1 अन्य
मिरी हस्ती है मिरी तर्ज़-ए-तमन्ना ऐ दोस्त
ख़ुद मैं फ़रियाद हूँ मेरी कोई फ़रियाद नहीं
इश्क़ है जी का ज़ियाँ इश्क़ में रक्खा क्या है
दिल-ए-बर्बाद बता तेरी तमन्ना क्या है
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टैग्ज़ : इश्क़और 1 अन्य
दिल ने तमन्ना की थी जिस की बरसों तक
ऐसे ज़ख़्म को अच्छा कर के बैठ गए
मसाफ़-ए-जीस्त में वो रन पड़ा है आज के दिन
न मैं तुम्हारी तमन्ना हूँ और न तुम मेरे