जोश मलीहाबादी और मुनासिबत-ए-अल्फ़ाज़ (शब्दों के तालमेल) का मसला: आधुनिक शायरी की एक त्रासदी
जोश मलीहाबादी जैसे आधुनिक शायरों ने क्लासिकी (शास्त्रीय) शायरी के उसूलों से अनजान होने के कारण अपनी शायरी में शब्दों के बेमेलपन और बेवजह तकरार (दोहराव) जैसी कमियाँ पैदा कीं।