इक़बाल की शायरी में क्लासिकी शेरियात और शब्दों की मुनासिबत का जलवा
इक़बाल को आमतौर पर 'पैग़ाम' का शायर समझा जाता है, लेकिन उनका कलाम क्लासिकी शेरियात, रिआयत, मुनासिबत और ईहाम के बेहतरीन फ़न्नी नमूनों से मालामाल है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
इक़बाल को आमतौर पर 'पैग़ाम' का शायर समझा जाता है, लेकिन उनका कलाम क्लासिकी शेरियात, रिआयत, मुनासिबत और ईहाम के बेहतरीन फ़न्नी नमूनों से मालामाल है।