हुस्न पर20 बेहतरीन शेर
हम हुस्न को देख सकते
हैं, महसूस कर सकते हैं इस से लुत्फ़ उठा सकते हैं लेकिन इस का बयान आसान नहीं। हमारा ये शेरी इन्तिख़ाब हुस्न देख कर पैदा होने वाले आपके एहसासात की तस्वीर गिरी है। आप देखेंगे कि शाइरों ने कितने अछूते और नए नए ढंग से हसन और इस की मुख़्तलिफ़ सूरतों को बयान किया। हमारा ये इन्तिख़ाब आपको हुस्न को एक बड़े और कुशादा कैनवस पर देखने का अहल भी बनाएगा। आप उसे पढ़िए और हुस्न-परस्तों में आम कीजिए।
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उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
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टैग्ज़: चाँदऔर 1 अन्य
तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत
हम जहाँ में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं
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टैग्ज़: तस्वीरऔर 2 अन्य
सुना है उस के बदन की तराश ऐसी है
कि फूल अपनी क़बाएँ कतर के देखते हैं
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टैग्ज़: महबूबऔर 1 अन्य
तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिन
ज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं
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टैग्ज़: आँखऔर 1 अन्य
इतने हिजाबों पर तो ये आलम है हुस्न का
क्या हाल हो जो देख लें पर्दा उठा के हम
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टैग्ज़: नक़ाबऔर 1 अन्य
उफ़ वो मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन
देखने वाले उसे ताज-महल कहते हैं
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टैग्ज़: बदनऔर 1 अन्य
इलाही कैसी कैसी सूरतें तू ने बनाई हैं
कि हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है
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टैग: हुस्न
रुख़-ए-रौशन के आगे शम्अ रख कर वो ये कहते हैं
उधर जाता है देखें या इधर परवाना आता है
वह अपने चमकते चेहरे के सामने दीपक रखकर यह कहते हैं।
देखें, तुम उस रोशनी की ओर जाते हो या पतंगे की तरह इधर आ जाते हो।
वह अपने चमकते चेहरे के सामने दीपक रखकर यह कहते हैं।
देखें, तुम उस रोशनी की ओर जाते हो या पतंगे की तरह इधर आ जाते हो।
निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं
वो आदमी है मगर देखने की ताब नहीं
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टैग्ज़: निगाहऔर 3 अन्य
मेरी निगाह-ए-शौक़ भी कुछ कम नहीं मगर
फिर भी तिरा शबाब तिरा ही शबाब है
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टैग्ज़: फ़ेमस शायरीऔर 2 अन्य
रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम
दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम
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टैग्ज़: महबूबऔर 1 अन्य
गूँध के गोया पत्ती गुल की वो तरकीब बनाई है
रंग बदन का तब देखो जब चोली भीगे पसीने में
ऐसा लगता है जैसे उसने गुलाब की पंखुड़ियों को गूँधकर अपना रूप बना लिया हो।
शरीर का असली रंग तब दिखता है जब पसीने से चोली भीग जाती है।
ऐसा लगता है जैसे उसने गुलाब की पंखुड़ियों को गूँधकर अपना रूप बना लिया हो।
शरीर का असली रंग तब दिखता है जब पसीने से चोली भीग जाती है।
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टैग्ज़: बदनऔर 1 अन्य
पूछो न अरक़ रुख़्सारों से रंगीनी-ए-हुस्न को बढ़ने दो
सुनते हैं कि शबनम के क़तरे फूलों को निखारा करते हैं
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टैग्ज़: रुख़्सारऔर 1 अन्य
न देखना कभी आईना भूल कर देखो
तुम्हारे हुस्न का पैदा जवाब कर देगा
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टैग्ज़: आईनाऔर 1 अन्य