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नए साल पर 20 बेहतरीन शेर

नए साल पर 20 बेहतरीन शेर

टॉप 20 सीरीज़

आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर

जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे

अहमद फ़राज़

देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़

इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है

Interpretation: Rekhta AI

मिर्ज़ा ग़ालिब इस शेर में ज्योतिष की उम्मीद और प्यार की कठोर सच्चाई की तुलना कर रहे हैं। पंडित जी ने तो कह दिया है कि साल अच्छा है, मगर शायर सोच रहा है कि क्या उस 'अच्छे साल' का असर महबूब की बेरुखी पर भी पड़ेगा? प्रेमी के लिए साल तभी अच्छा माना जाता है जब उसका महबूब उस पर मेहरबान हो, चाहे सितारे कुछ भी कहें।

Interpretation: Rekhta AI

मिर्ज़ा ग़ालिब इस शेर में ज्योतिष की उम्मीद और प्यार की कठोर सच्चाई की तुलना कर रहे हैं। पंडित जी ने तो कह दिया है कि साल अच्छा है, मगर शायर सोच रहा है कि क्या उस 'अच्छे साल' का असर महबूब की बेरुखी पर भी पड़ेगा? प्रेमी के लिए साल तभी अच्छा माना जाता है जब उसका महबूब उस पर मेहरबान हो, चाहे सितारे कुछ भी कहें।

मिर्ज़ा ग़ालिब

इक साल गया इक साल नया है आने को

पर वक़्त का अब भी होश नहीं दीवाने को

इब्न-ए-इंशा

तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई

वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई

फ़ैज़ लुधियानवी

यकुम जनवरी है नया साल है

दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है

अमीर क़ज़लबाश

कोई रंज का लम्हा किसी के पास आए

ख़ुदा करे कि नया साल सब को रास आए

फ़रियाद आज़र

किसी को साल-ए-नौ की क्या मुबारकबाद दी जाए

कैलन्डर के बदलने से मुक़द्दर कब बदलता है

ऐतबार साजिद

उम्र का एक और साल गया

वक़्त फिर हम पे ख़ाक डाल गया

शकील जमाली

फिर नए साल की सरहद पे खड़े हैं हम लोग

राख हो जाएगा ये साल भी हैरत कैसी

अज़ीज़ नबील

इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ

लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी

हफ़ीज़ मेरठी

पुराने साल की ठिठुरी हुई परछाइयाँ सिमटीं

नए दिन का नया सूरज उफ़ुक़ पर उठता आता है

अली सरदार जाफ़री

एक पत्ता शजर-ए-उम्र से लो और गिरा

लोग कहते हैं मुबारक हो नया साल तुम्हें

अज्ञात

ये किस ने फ़ोन पे दी साल-ए-नौ की तहनियत मुझ को

तमन्ना रक़्स करती है तख़य्युल गुनगुनाता है

अली सरदार जाफ़री

नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें

चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें

अज्ञात

चेहरे से झाड़ पिछले बरस की कुदूरतें

दीवार से पुराना कैलन्डर उतार दे

ज़फ़र इक़बाल

दुल्हन बनी हुई हैं राहें

जश्न मनाओ साल-ए-नौ के

साहिर लुधियानवी

नया साल दीवार पर टाँग दे

पुराने बरस का कैलेंडर गिरा

मोहम्मद अल्वी

मुबारक मुबारक नया साल आया

ख़ुशी का समाँ सारी दुनिया पे छाया

अख़्तर शीरानी

पलट सी गई है ज़माने की काया

नया साल आया नया साल आया

अख़्तर शीरानी

बहार-ए-हुस्न ये दो दिन की चाँदनी है हुज़ूर

जो बात अब की बरस है वो पार साल नहीं

लाला माधव राम जौहर
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