Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

क़ुर्बानी पर शेर

मुझ को अता हुआ है ये कैसा लिबास-ए-ज़ीस्त

बढ़ते हैं जिस के चाक बराबर रफ़ू के साथ

शकील जाज़िब

ये ना-क़द्री हमारी इस लिए है

तिरा होने में जल्दी कर गए हम

नदीम शाद

जवाँ हुई मिरी बेटी तो हाथ ख़ाली हैं

तमाम 'उम्र तो बहनें बियाहता रहा मैं

सरवर ख़ान सरवर

जो हम पे गुज़री है उस का नहीं अलम कोई

ग़म-ए-हुसैन से बढ़ कर नहीं है ग़म कोई

जव्वाद सरवर सैय्यद

नेज़ा हो कि प्याला लब-ए-इंकार सलामत

ये सिलसिला सुक़रात से शब्बीर तलक है

राज़ एहतिशाम

मैं हवाओं से लड़ा हूँ जिस की ख़ातिर 'उम्र भर

उस दिए ने ही मिरे घर को जला कर रख दिया

दीपेश शर्मा सौभरि

पासबानी करते करते उस की आँखें बुझ गईं

'उम्र भर जो ख़्वाहिश-ए-ता'मीर-ए-दर करता रहा

फ़ैज़ आलम बाबर

जगह जगह थे भँवर 'इश्क़ के समुंदर में

वो ख़ुद भी डूब गया था मुझे बचाते हुए

फ़ैज़ आलम बाबर

इक हयात-ए-नौ छुपी है कर्बला की राह में

कर्बला राह-ए-'अमल है मंज़िल-ए-मातम नहीं

एम अली

ज़र्रा ज़र्रा पुकारता है अहद

जब शहादत बिलाल देता है

क़ासिम रहमान

वही ना-क़द्री-ए-अबना-ए-जहाँ है लेकिन

जाँ-निसारी वही ईमान-ए-वफ़ा आज भी है

अब्दुल अज़ीज़ फ़ितरत
बोलिए