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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

अक़ीदत पर शेर

तू जिस के दम पर भी बोलता है

मिरे ख़ुदा से बड़ा नहीं है

बिलाल अख़्तर

मैं मोहब्बत में बहुत सों को ख़ुदा मानता हूँ

तुम किसी एक का पूछोगे तो माँ बोलूँगा

काशिफ़ औरा

शे'र कह के गुज़ार सकते हैं

ज़िंदगी हो या माँ का दिन 'काशिफ़'

काशिफ़ औरा

जबीनों पर निशाँ सज्दों के हैं हाथों में शमशीरें

अक़ीदे ने तशद्दुद के बदन को ओढ़ रखा है

सदफ़ मिर्ज़ा

जो हम पे गुज़री है उस का नहीं अलम कोई

ग़म-ए-हुसैन से बढ़ कर नहीं है ग़म कोई

जव्वाद सरवर सैय्यद

अपना सर वो कैसे झुकाए इस सागर की चौखट पर

गंगा जी के तट पर यारो जिस जोगी का ठिकाना है

राही मासूम रज़ा

आप की भक्ती न जब तक हो तो क्या हासिल मुझे

क़ैद-ए-दुनिया से अगर हो जाऊँ मैं आज़ाद भी

धर्म देवी

तुम्हारी भी हिफ़ाज़त हम करेंगे

तुम्हारे फिर ख़ुदा होने का मतलब

शरजील अंसारी

तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ तुझे चाहे 'काशिफ़'

झंग के लोग मोहब्बत में ख़ुदा होते हैं

काशिफ़ औरा

ख़ुद्दार हूँ ख़ुद-सर हूँ मैं ख़ुद-मस्त हूँ लेकिन

तू सामने आ जाए तो सर आज भी ख़म है

वासिफ़ अली वासिफ़
बोलिए