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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

कभी न ख़त्म होने वाली रात पर शेर

रात की ख़ामोशी, तन्हाई,

उदासी, इंतज़ार, ख़्वाब, मोहब्बत और यादों से जुड़े अलग-अलग एहसासों और कैफ़ियतों को बयान करते अशआर का चयन। कहीं रात सुकून और ख़्वाबों की अलामत है, तो कहीं बेख़्वाबी, हिज्र और दिल की बेचैनी का रूपक। इस टैग में रात के अनगिनत रंगों और इंसानी जज़्बात के विभिन्न पहलुओं को शायरी के आईने में पेश किया गया है।

इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के

अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के

फ़रहत एहसास

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर अपने ही भरोसे पर पछतावा और आत्म-तिरस्कार दिखाता है। वादा पूरा न होने से इंतज़ार इतना भारी और लंबा लगता है कि उसे “क़यामत” जैसा कहा गया है। यहाँ क़यामत अंत-काल नहीं, बल्कि मन की घबराहट, टूटन और निराशा का रूपक है।

दाग़ देहलवी

रात आ कर गुज़र भी जाती है

इक हमारी सहर नहीं होती

इब्न-ए-इंशा

जागता हूँ मैं एक अकेला दुनिया सोती है

कितनी वहशत हिज्र की लम्बी रात में होती है

शहरयार

ज़िंदगी किस तरह कटेगी 'सैफ़'

रात कटती नज़र नहीं आती

सैफ़ुद्दीन सैफ़

दिन कटा जिस तरह कटा लेकिन

रात कटती नज़र नहीं आती

सय्यद मोहम्मद असर

रात काटे नहीं कटती है किसी सूरत से

दिन तो दुनिया के बखेड़ों में गुज़र जाता है

मुमताज़ मीरज़ा

न पाया वक़्त ऐ ज़ाहिद कोई मैं ने इबादत का

शब-ए-हिज्राँ हुई आख़िर तो सुब्ह-ए-इंतिज़ार आई

मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस

ये वही रात है जिस में कोई रोने वाला

रोने लगता है तो रोता ही चला जाता है

तरकश प्रदीप

शाम-ए-ग़म की सहर नहीं होती

आह भी कारगर नहीं होती

साजिद सिद्दीक़ी लखनवी

शाम-ए-ग़म की सहर नहीं होती

या हमीं को ख़बर नहीं होती

इब्न-ए-इंशा

ऐ 'ज़की' हिज्र की रातें नहीं काटे कटतीं

कोई अच्छी सी ग़ज़ल गाओ कि कुछ रात कटे

ज़की काकोरवी

सर्द रात अपनी नहीं कटती कभी तेरे बग़ैर

ऐसे मौसम में तो और आग लगाती है हवा

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

ये लम्बी रात ये बे-ख़्वाबी ये करवट करवट बेताबी

मौसम के बसंती छींटों ने क्या आग जिगर में लगाई है

युसूफ़ जमाल

होंटों पे हँसी पैहम आते हुए शरमाती

अब रात नहीं कटती अब नींद नहीं आती

असरार-उल-हक़ मजाज़

शाम नहीं ढलती किसी सूरत रात नहीं कटती किसी तौर

अब तो बहुत दिल घबराए है अब तो बहुत याद आओ हो

शौकत परदेसी
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