ललित कलाएँ: इंसानी रूह के अंदरूनी बिखराव का जमालियाती (सौंदर्यपरक) इलाज
फ़िराक़ गोरखपुरी के मुताबिक़ इंसानी ज़ेहन में मौजूद तह-उश-शुऊरी (अवचेतन) प्रभाव एक ख़ामोश हलचल पैदा करते हैं, और फ़ुनून-ए-लतीफ़ा (ललित कलाएँ) इस ज़ेहनी बिखराव को हम-आहंगी (तालमेल) में बदल कर रूह को सेहत बख़्शते हैं।