ग़ज़ल में इंशाइया और ख़बरिया अंदाज़-ए-बयान की अहमियत
क्लासिकी ग़ज़ल में इंशाइया (सवालिया) अंदाज़ को ख़बरिया अंदाज़ पर ज़्यादा अहमियत हासिल है क्योंकि यह शेर में मानी (अर्थ) की अनगिनत संभावनाएँ पैदा करता है।
क्लासिकी ग़ज़ल में इंशाइया (सवालिया) अंदाज़ को ख़बरिया अंदाज़ पर ज़्यादा अहमियत हासिल है क्योंकि यह शेर में मानी (अर्थ) की अनगिनत संभावनाएँ पैदा करता है।
Added to your favorites
नई जानकारियाँ प्राप्त करने के लिए रेख़्ता न्यूज़ लेटर सब्स्क्राइब कीजिए