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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

दीवानगी पर शेर

ख़ुदारा इक निगाह-ए-नाज़ ही से देख लो हम को

गरेबाँ फाड़ने को आज हम तय्यार बैठे हैं

नवाब सैफ अली सय्याफ़

चुप चुप मकान रास्ते गुम-सुम निढाल वक़्त

इस शहर के लिए कोई दीवाना चाहिए

निदा फ़ाज़ली

नासेह की नसीहत से है ज़िद और भी दिल को

सुनता नहीं होश्यार की दीवाना हमारा

शऊर बिलग्रामी

घूरने से क्या तुम्हारी आँखों के हम डर गए

वे अगर हैं मस्त प्यारे तो दीवाने हैं हम

रज़ा अज़ीमाबादी

आज फिर टूटेंगी तेरे घर की नाज़ुक खिड़कियाँ

आज फिर देखा गया दीवाना तेरे शहर में

कैफ़ी आज़मी

गुज़र गए हैं वो लम्हे भी इश्क़ में दोस्त

तिरे बग़ैर भी जब ख़ुश रहे हैं दीवाने

नाज़िश प्रतापगढ़ी

उठा के सर मुझे इतना तो देख लेने दे

कि क़त्ल-गाह में दीवाने आए हैं क्या क्या

कैफ़ी आज़मी

तेरे शैदा भी हुए इश्क़-ए-तमाशा भी हुए

तेरे दीवाने तिरे शहर में रुस्वा भी हुए

सज्जाद बाक़र रिज़वी

वहशत का उनवान हमारी उन में से जो नार बनी

देखेंगे तो लोग कहेंगे 'इंशा'-जी दीवाने थे

इब्न-ए-इंशा

सब्ज़ तितली थी 'राशिदा' माहीन

नर्गिसी फूल पर मरी हुई थी

राशिदा माहीन मलिक

देखूँ तुझे क़रीब से फ़ुर्सत से चैन से

मेरा ये ख़्वाब मुझ को लिए दर-ब-दर गया

गौतम राजऋषि

बहुत मासूम हैं 'नाशाद' कर के हम को दीवाना

हमीं से पूछते हैं चाक-दामानों पे क्या गुज़री

इसहाक़ नाशाद

हरीफ़-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना क्या कोई तुम्हारा हो

जिसे दीवाना तुम करते हो वो दीवाना होता है

अब्दुल मन्नान बेदिल अज़ीमाबादी
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