हर शख़्स पर किया न करो इतना ए'तिमाद
हर साया-दार शय को शजर मत कहा करो
नासेह की नसीहत से है ज़िद और भी दिल को
सुनता नहीं होश्यार की दीवाना हमारा
हज़ार आप नसीहत करें मगर नासेह
जिसे क़ुबूल करे दिल वही मुनासिब है
मज़ा आता नसीहत में भी शायद
अगर नासेह ज़रा दीवाना होता
हमारे दोस्त हमें बद-गुमान कर देंगे
अब इल्तिफ़ात बहुत बरमला नहीं रखना
जिस को मिल जाना हो मिल जाओ मगर मुश्किल से
देखो इस शह्र में आना तो न आसाँ होना