हो शोख़ कलर गोरा बदन तीखा लिबादा
हो शोख़ कलर गोरा बदन तीखा लिबादा
अपनी तो तलब एक है पेशानी कुशादा
इस शहर में क्या करना है 'उश्शाक़ ने रह कर
इस शहर में साग़र है न मीना है न बादा
जीना है तो जीना है फ़क़त तेरे सहारे
अपनी मैं बताऊँ तो यही एक इरादा
चाहूँ भी तो मैं शुक्र अदा कर नहीं पाऊँ
इन'आम तिरे मुझ पे हैं कुछ इतने ज़ियादा
पाँव तो सलामत हैं अगर जूते नहीं तो
शाकिर हूँ ख़ुदाया मैं तिरा पैर पियादा
हर चाल ज़माने की समझता है 'बुख़ारी'
सादा है मगर इतना भी 'आसिम' नहीं सादा
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