मैं आज ज़द पे अगर हूँ तो ख़ुश-गुमान न हो
चराग़ सब के बुझेंगे हवा किसी की नहीं
ऐसा गुलशन की सियासत ने किया है पाबंद
हम असीरान-ए-क़फ़स आह भी करने के नहीं
नई लाशें बिछाने के लिए ही
गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं
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तुम्हारे साथ त'अल्लुक़ तो दोस्ताना था
तुम इस में रंग-ए-सियासत कहाँ से ले आए
मिलेगी सीट इलेक्शन में आप को इक दिन
अगर ये चमचा-गरी कामयाब हो जाए
दस्तख़त तो मुझे भी आता है
काश मैं भी वज़ीर हो जाऊँ
है बजट घाटे में जुर्माने ज़रूरी हैं यहाँ
इस लिए सरकार मेरी लूट कर खाने को है
केक बिस्कुट खाएँगे उल्लू के पट्ठे रात-दिन
और शरीफ़ों के लिए आटा गराँ हो जाएगा
कुछ भी पीते नहीं ये क़ौम की यख़्नी के सिवा
नाश्ता मिल्लत-ए-बैज़ा का किया करते हैं
ख़ातून रहनुमा से जो शादी हुई मिरी
जम्हूरियत का हुस्न मिरे घर में आ गया
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नेता है दिल का चाहे तो दिल से निकाल दे
लेकिन हमारे घपलों की फ़र्द-ए-सज़ा न माँग
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हैं हमारे जितने लीडर सभी भुट्टे चोर क्यों हैं
कोई चारा-साज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
ज़िंदगी हो मिरी नेताओं की सूरत या-रब
हो फ़क़त अपनी ग़रज़ से ही मोहब्बत या-रब
कोई अच्छी वज़ारत गर किसी मेम्बर को मिल जाए
तो बाक़ी के वज़ीरों को बड़ी तकलीफ़ होती है
हालात बदल सकते हैं 'मन्नान' किसी वक़्त
बन जाएँगे अब साहब-ए-दस्तार तमाशा
बात मनवानी है अर्बाब-ए-हुकूमत से अगर
नित-नए ढोंग रचा धूम मचा माई डीयर
अज़मत-ए-मुल्क इस सियासत के
हाथ नीलाम हो रही है अब
हैं कवाकिब कुछ नज़र आते हैं कुछ
देते हैं धोका ये बाज़ीगर खुला