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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

अबरू पर शेर

न जाएगा मेरे दिल से ख़याल-ए-अबरू-ए-दिलबर

कि तेग़ों ही के साए में तो है जन्नत मुसलमाँ की

मोहम्मद अब्बास सफ़ीर

बल पड़े चितवन पे अबरू तन के ख़ंजर हो गए

ज़िक्र-ए-वस्ल आते ही वो जामे से बाहर हो गए

शेर सिंह नाज़ देहलवी

है इसी में प्यार की आबरू वो जफ़ा करें मैं वफ़ा करूँ

जो वफ़ा भी काम न आ सके तो वही कहें कि मैं क्या करूँ

राजा मेहदी अली ख़ाँ
बोलिए