Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Wali Dakni's Photo'

वली दकनी

1667 - 1707 | गुजरात, भारत

दिल्ली में उर्दू शायरी को स्थापित करने वाले क्लासिकी शायर

दिल्ली में उर्दू शायरी को स्थापित करने वाले क्लासिकी शायर

वली दकनी के शेर

4.8K
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

उसे ज़िंदगी क्यूँ भारी लगे

मुफ़लिसी सब बहार खोती है

मर्द का ए'तिबार खोती है

याद करना हर घड़ी तुझ यार का

है वज़ीफ़ा मुझ दिल-ए-बीमार का

चाहता है इस जहाँ में गर बहिश्त

जा तमाशा देख उस रुख़्सार का

फिर मेरी ख़बर लेने वो सय्याद आया

शायद कि मिरा हाल उसे याद आया

किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

कि आतिश गुल कूँ करती है गुलाब आहिस्ता आहिस्ता

ख़ूब-रू ख़ूब काम करते हैं

यक निगह में ग़ुलाम करते हैं

दिल-ए-उश्शाक़ क्यूँ हो रौशन

जब ख़याल-ए-सनम चराग़ हुआ

तुझ लब की सिफ़त लाल-ए-बदख़्शाँ सूँ कहूँगा

जादू हैं तिरे नैन ग़ज़ालाँ सूँ कहूँगा

गुल हुए ग़र्क़ आब-ए-शबनम में

देख उस साहिब-ए-हया की अदा

पी के बैराग की उदासी सूँ

दिल पे मेरे सदा उदासी है

राह-ए-मज़मून-ए-ताज़ा बंद नहीं

ता क़यामत खुला है बाब-ए-सुख़न

देखना हर सुब्ह तुझ रुख़्सार का

है मुताला मतला-ए-अनवार का

आज तेरी भवाँ ने मस्जिद में

होश खोया है हर नमाज़ी का

शग़्ल बेहतर है इश्क़-बाज़ी का

क्या हक़ीक़ी क्या मजाज़ी का

आरज़ू-ए-चश्मा-ए-कौसर नईं

तिश्ना-लब हूँ शर्बत-ए-दीदार का

तेरे लब के हुक़ूक़ हैं मुझ पर

क्यूँ भुला दूँ मैं दिल से हक़्क़-ए-नमक

नूर-ए-जान-ओ-दीदा तिरे इंतिज़ार में

मुद्दत हुई पलक सूँ पलक आश्ना नईं

किशन की गोपियाँ की नईं है ये नस्ल

रहें सब गोपियाँ वो नक़्ल ये अस्ल

हर ज़र्रा उस की चश्म में लबरेज़-ए-नूर है

देखा है जिस ने हुस्न-ए-तजल्ली बहार का

जामा-ज़ेबों को क्यूँ तजूँ कि मुझे

घेर रखता है दौर दामन का

रश्क सूँ तुझ लबाँ की सुर्ख़ी पर

जिगर-ए-लाला दाग़ दाग़ हुआ

आज तुझ याद ने दिलबर-ए-शीरीं-हरकात

आह को दिल के उपर तेशा-ए-फ़रहाद किया

हो क्यूँ शोर दिल की बाँसुली में

मलाहत का सलोना कान पहुँचा

मिरे दिल की तजल्ली क्यों रहे पोशीदा मज्लिस में

ज़'ईफ़ी सूँ हुआ है पर्दा-ए-फ़ानूस तन मेरा

छुपा हूँ मैं सदा-ए-बाँसुली में

कि ता जानूँ परी-रू की गली में

'वली' रख दिल में आवे वो सनम आहंग-ए-शौक़

नग़मा-ए-'उश्शाक़ का आवे अगर कानूँ मुझे

Recitation

बोलिए