कारवान-ए-ज़िंदगानी है रवाँ अपनी जगह
कारवान-ए-ज़िंदगानी है रवाँ अपनी जगह
साज़-ए-दिल अपनी जगह है सोज़-ए-जाँ अपनी जगह
कुछ नहीं बदला कहीं तेरे बिछड़ जाने के बा'द
ये ज़मीं अपनी जगह वो आसमाँ अपनी जगह
मस्लहत ये भी ख़ुदा की देखने की चीज़ है
मुंजमिद माहौल में सैल-ए-रवाँ अपनी जगह
वक़्त की रफ़्तार का दिल पर असर होता नहीं
ख़्वाहिशें अपनी जगह 'उम्र-ए-रवाँ अपनी जगह
मश्क़ करती हूँ मुसलसल भूल जाने की उसे
नाम उस का है मगर विर्द-ए-ज़बाँ अपनी जगह
मो'तबर दोनों हैं 'मीना' एक भी कमतर नहीं
अहल-ए-दिल अपनी जगह अहल-ए-ज़बाँ अपनी जगह
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