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उर्दू सौतियात पर स्कॉलर

इक़बाल की शायरी का सौतियाती (ध्वन्यात्मक) तिलिस्म: सफ़ीरी और मुसलसल आवाज़ों का कमाल

यह लेख अल्लामा इक़बाल की शायरी में ध्वन्यात्मक लय, ख़ास तौर पर सफ़ीरी (Sibilants) और मुसलसल (Continuants) आवाज़ों के बहुत ज़्यादा इस्तेमाल और उनसे पैदा होने वाले माहौल का विश्लेषण करता है।

इक़बाल की शायरी का मिज़ाज और हकार (Aspirated) व माकूसी (Retroflex) आवाज़ों से परहेज़

इस मज़मून (लेख) में इस बात का जायज़ा लिया गया है कि अल्लामा इक़बाल ने अपनी शायरी में उर्दू की भारी-भरकम हकार (Aspirated) और माकूसी (Retroflex) आवाज़ों का इस्तेमाल कितना कम किया है और इससे उनके शायरी के अंदाज़ पर क्या असर पड़ा है।

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