ब्रज भाषा और अरबी-फ़ारसी इल्म-ए-बदीअ (अलंकार) का तुलनात्मक जायज़ा
अल्लामा शिबली नोमानी ने ब्रज भाषा के सनाए-ओ-बदाए (अलंकार) की अरबी और फ़ारसी की सनअतों से तुलना करते हुए हिंदी शायरी की ख़ूबसूरती और ख़यालों की नज़ाकत को उजागर किया है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
अल्लामा शिबली नोमानी ने ब्रज भाषा के सनाए-ओ-बदाए (अलंकार) की अरबी और फ़ारसी की सनअतों से तुलना करते हुए हिंदी शायरी की ख़ूबसूरती और ख़यालों की नज़ाकत को उजागर किया है।