इंजन, कैंप और तोप: अकबर की शायरी में साम्राज्यवादी प्रतीक
अकबर इलाहाबादी उर्दू के वह अकेले शायर हैं जिन्होंने नई पश्चिमी ईजादों जैसे रेल, इंजन और तोप को महज़ चीज़ों के तौर पर नहीं, बल्कि औपनिवेशिक ताक़त और तहज़ीबी दबदबे के प्रतीकों के तौर पर बरता।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
अकबर इलाहाबादी उर्दू के वह अकेले शायर हैं जिन्होंने नई पश्चिमी ईजादों जैसे रेल, इंजन और तोप को महज़ चीज़ों के तौर पर नहीं, बल्कि औपनिवेशिक ताक़त और तहज़ीबी दबदबे के प्रतीकों के तौर पर बरता।