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अज्ज़-ए-नज़्म पर स्कॉलर

शेर में 'हश्व' और 'इज्ज़-ए-नज़्म': ग़ज़ल की तकनीकी ख़ामियाँ

ग़ज़ल की सबसे बड़ी शर्त शब्दों का कम से कम और सही इस्तेमाल है। ग़ैर-ज़रूरी शब्दों (हश्व) और बात पूरी न कर पाने (इज्ज़-ए-नज़्म) से शेर की ख़ूबसूरती तबाह हो जाती है।

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