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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

चित्र शायरी

चित्र शायरी का यह पहला ऐसा ऑनलाइन संकलन है जिसमें हज़ारों ख़ूबसूरत शेरों को उनके अर्थ के अनुकूल चित्रों के साथ पेश किया गया है. यह आकर्षक प्रस्तुति न सिर्फ़ शेर को समझने में सहायक होगी बल्कि इसके द्वारा अर्थ के विभिन्न अभिप्राय तक पहुंचना भी संभव हो सकेगा. इन शेरों को पढ़िए, देखिए, और शेर-प्रेमियों के साथ साझा कीजिए.

हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है

वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता

Interpretation: Rekhta AI

इस शे’र में बिछड़ जाने के बाद भी याद के बने रहने का भाव है। कवि ग़ालिब को उनकी सोच की पहचान से याद करता है—हर बात में “अगर/काश” के सवाल उठाना। “यूँ होता तो क्या होता” पछतावे, बेचैनी और भीतर की टटोल का रूप बन जाता है। दुख यह है कि इंसान चला जाता है, पर उसकी खास बोलचाल और अंदाज़ रह जाता है।

Interpretation: Rekhta AI

इस शे’र में बिछड़ जाने के बाद भी याद के बने रहने का भाव है। कवि ग़ालिब को उनकी सोच की पहचान से याद करता है—हर बात में “अगर/काश” के सवाल उठाना। “यूँ होता तो क्या होता” पछतावे, बेचैनी और भीतर की टटोल का रूप बन जाता है। दुख यह है कि इंसान चला जाता है, पर उसकी खास बोलचाल और अंदाज़ रह जाता है।

मिर्ज़ा ग़ालिब
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