धड़कन मिरी गुन गाए तो लगता है कि तुम हो
धड़कन मिरी गुन गाए तो लगता है कि तुम हो
चेहरा कोई इतराए तो लगता है कि तुम हो
ख़्वाबों की तरह सहन-ए-तमन्ना में अचानक
इक फूल जो खिल जाए तो लगता है कि तुम हो
सहरा में कहीं दूर किसी तिश्ना-लबों पर
बारिश कोई बरसाए तो लगता है कि तुम हो
तन्हाई के रस्ते पे सफ़र करते हुए जब
साया कोई साथ आए तो लगता है कि तुम हो
महफ़िल में तिरी याद का इक नग़्मा-ए-ख़ामोश
धीरे से कोई गाए तो लगता है कि तुम हो
तारीकी-ए-शब में मिरे वीरान मकाँ पर
इक चाँद उतर आए तो लगता है कि तुम हो
वीरान से सुनसान से रस्ते पे 'असद' जब
पायल कोई छनकाए तो लगता है कि तुम हो
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