तुम से बिछड़े तो सोचा था बस एक जाँ से अलग हो गए
तुम से बिछड़े तो सोचा था बस एक जाँ से अलग हो गए
अब लगा एक जाँ से नहीं दो जहाँ से अलग हो गए
ऐ वतन रह के परदेस में ऐसे घुट घुट के रोते थे हम
जैसे बच्चे किसी भीड़ में अपनी माँ से अलग हो गए
दास्ताँ लिखने वाले ने तो सब हमारे ही ख़ूँ से लिखा
और सितम देखिए फिर हमीं दास्ताँ से अलग हो गए
यार खिलने पे पहरे लगे और महकने पे पाबंदियाँ
अब ये समझे कि हम किस लिए गुलसिताँ से अलग हो गए
कारवाँ में जो शामिल रहे उन को बस एक मंज़िल मिली
उन की वुस'अत न पूछो कि जो कारवाँ से अलग हो गए
क्या कहा आप को छोड़ कर हम जिएँगे अजी छोड़िए
क्या सुना है सितारे कभी आसमाँ से अलग हो गए
तुम ख़ुदा तो नहीं हो 'नदीम' एक दिन तुम भी मर जाओगे
फिर तकब्बुर भला किस लिए तुम कहाँ से अलग हो गए
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