मीर का अनुसरण और ग़ालिब की अलग पहचान
मीर तक़ी मीर की तक़लीद (नक़्ल) करने में बाद के शायरों (जैसे ज़ौक़, फ़िराक़ और नासिर काज़मी) की नाकामी और ग़ालिब की वह तख़्लीक़ी हिकमत-ए-अमली (रचनात्मक रणनीति) जिसने उन्हें मीर का सच्चा वारिस बनाया।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
मीर तक़ी मीर की तक़लीद (नक़्ल) करने में बाद के शायरों (जैसे ज़ौक़, फ़िराक़ और नासिर काज़मी) की नाकामी और ग़ालिब की वह तख़्लीक़ी हिकमत-ए-अमली (रचनात्मक रणनीति) जिसने उन्हें मीर का सच्चा वारिस बनाया।