पुख़्ता कर ले ऐ ज़ाहिद अपना ईमाँ
मस्जिद से पहले मय-ख़ाना पड़ता है
ख़ुद को तन्हा न समझ जाम उठा ले 'ज़ाहिद'
ऐसा साथी तो मुक़द्दर से मिला करता है
इसे पीते हैं आँखें बंद करके बादा कश ज़ाहिद
निगाहों से ये शीशे की परी देखी नहीं जाती
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
पुख़्ता कर ले ऐ ज़ाहिद अपना ईमाँ
मस्जिद से पहले मय-ख़ाना पड़ता है
ख़ुद को तन्हा न समझ जाम उठा ले 'ज़ाहिद'
ऐसा साथी तो मुक़द्दर से मिला करता है
इसे पीते हैं आँखें बंद करके बादा कश ज़ाहिद
निगाहों से ये शीशे की परी देखी नहीं जाती