तख़लीक़ियत (रचनात्मकता), इंफ़िरादियत (निजता) और मारूज़ियत (वस्तुनिष्ठता) का भ्रम: एक आलोचनात्मक जायज़ा
यह मज़मून (लेख) अदब में 'ओरिजिनैलिटी' (मौलिक रचना) के रूमानी तसव्वुर (विचार) और ऐतिहासिक अध्ययन में 'मारूज़ियत' (वस्तुनिष्ठता) के दावे का आलोचनात्मक जायज़ा लेता है, और साफ़ करता है कि लेखक का ज़ेहन संस्कृति से आज़ाद नहीं होता।