गलियों गलियों शहरों शहरों किस ने आग लगाई है
बुग़्ज़-ओ-नफ़रत का दुनिया को किस ने ये माहौल दिया
बे-सबब दोनों में हर एक को दिलचस्पी थी
और हर एक से बेज़ार थे हम भी तुम भी
बे-सबब दोनों में हर एक को दिलचस्पी थी
और हर एक से बेज़ार थे हम भी तुम भी
बे-सबब दोनों में हर एक को दिलचस्पी थी
और हर एक से बेज़ार थे हम भी तुम भी
ख़िरद की आग में सदियों जले बदन लेकिन
दिल-ओ-दिमाग़ से बू-ए-मुनाफ़िरत न गई