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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

नफ़रत पर शेर

ये कैसा ऐब है मेरे नगर के लोगों में

दिए जला न सके तो बुझाने आए हैं

ज़किया ग़ज़ल

ज़र ज़मीं तो न थी मुक़द्दर में

उस ने विर्से में दुश्मनी पाई

आसिम बुख़ारी

बदल न लें कहीं रस्ता ये आग की लपटें

हमें ही राख न कर दें ये नफ़रतें अपनी

नोमान शौक़

इतना नज़रों से गिरा है कोई

उस को देखूँ तो हँसी आती है

फ़ातिमा मोहतशिम

रेंगते हैं किरमक-ए-बुग़ज़-ओ-'इनाद

शहर का हर जिस्म है दीमक-ज़दा

ऐमन जाफ़री
बोलिए