ज़हूर मिन्हास
ग़ज़ल 7
अशआर 21
ये भी मुमकिन है उर्दू ज़बाँ में कहूँ और दुनिया के फ़िक्शन से बेहतर लगे
आह भरने लगें रश्क करने लगें काफ़का मोपसां कोई ऐसी ग़ज़ल
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काश मैं कह सकूँ अपने रंगीन ख़्वाबों में डूबी हुई लड़कियाँ जब पढ़ें
और पढ़ते समय ख़्वाब-गाहों में उड़ने लगें तितलियाँ कोई ऐसी ग़ज़ल
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