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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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वासिफ़ अली वासिफ़

1929 - 1993 | लाहौर, पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रसिद्ध सूफ़ी चिंतक, शायर, साहित्यकार और स्तंभकार

पाकिस्तान के प्रसिद्ध सूफ़ी चिंतक, शायर, साहित्यकार और स्तंभकार

वासिफ़ अली वासिफ़

ग़ज़ल 39

अशआर 32

तुम्हारी बे-रुख़ी को ख़ाक परवा

तिरी महफ़िल में कोई ख़ाक आए

महशर से कम नहीं है ये हंगाम-ए-ज़िंदगी

फिरते हैं लाखों आदमी तन्हा नगर में गुम

ये है मय-ख़ाना-ओ-सनम-ख़ाना

राह के इंतिख़ाब के दिन हैं

यार की याद बन के रहता है

ज़ख़्म का इंदिमाल क्या होगा

मिल चुके ख़ाक में मगर तेरा

दिल अभी इंतिज़ार करता है

नअत 3

 

पुस्तकें 35

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