जंगल
रौशनियाँ
रंग की लहरों पे रवाँ
रक़्स-कुनाँ
साज़-ओ-आवाज़ का रक़्स
मस्ती-ओ-नाज़ का रक़्स
ये फ़ुसूँ-कारी अंदाज़-ओ-अदा
ये ख़म-ओ-पेच का लहराता ख़रोश
दाएरे बुनती हुई मौज-ए-बदन
तीर-अंदाज़ कमानों की लचक
गोल उठानों की लचक
हर क़दम चाँद की शाख़ों का झुकाव
आसमाँ और ज़मीं मिलते हुए
ख़त-ए-उफ़ुक़ एक लचक
बदलियाँ लहराती हुई
मर्मरी नर्म ढलानों का बहाव
साज़ की लहर पे उठता हुआ बे-कल तूफ़ाँ
लर्ज़ां पेचाँ
झूमते झुकते सँभलते हुए अश्जार की नाव
बादबाँ उड़ते हुए खुलते हुए
सेब हिलते हुए टकराते हुए
नदियाँ पिघली हुईं
सरसराते हुए जंगल की महक
साँप फुंकारते बल खाते हुए
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