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एक मुद्दत से तमन्नाओं की वीरानी में हूँ

एजाज़ अासिफ़

एक मुद्दत से तमन्नाओं की वीरानी में हूँ

एजाज़ अासिफ़

MORE BYएजाज़ अासिफ़

    एक मुद्दत से तमन्नाओं की वीरानी में हूँ

    मुझ को क्या तेरी ख़बर मैं ख़ुद परेशानी में हूँ

    कान रखता है तो सुन कर मुझे तन्हाई में

    दास्तान-ए-आरज़ू हूँ आँख के पानी में हूँ

    शाख़ हूँ लेकिन कोई पत्ता नहीं है जिस्म पर

    हवा-ए-सुर्ख़ ले जा कि 'उर्यानी में हूँ

    आइनों के दरमियाँ रहती थी मेरी ज़िंदगी

    आज उन से दूर हो कर भी मैं हैरानी में हूँ

    किस लिए बेदार रखता हूँ मैं अपने आप को

    गए लम्हे बता मैं किस पशेमानी में हूँ

    ज़ेहन में रहती हैं फिर क्यूँ ख़ौफ़ की परछाइयाँ

    मैं अगर 'आसिफ़' किसी ग़म की निगहबानी में हूँ

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