शिद्दत-ए-एहसास-ए-तन्हाई में हम रहने लगे
शिद्दत-ए-एहसास-ए-तन्हाई में हम रहने लगे
इक हवेली छोड़ कर खाई में हम रहने लगे
चश्म-ए-उल्फ़त ख़्वाब-ए-रा'नाई में हम रहने लगे
हर घड़ी ज़िक्र-ए-शनासाई में हम रहने लगे
उन से आँखें मिलते ही मशहूर हर जानिब हुए
जाने कैसी कैसी रुस्वाई में हम रहने लगे
यार बीवी बच्चे रिश्ते भाई बहनें वालदैन
बारी बारी सब की बीनाई में हम रहने लगे
दर्द-ए-दिल दर्द-ए-जिगर दर्द-ए-तमन्ना दर्द-ए-शौक़
दर्द की किस दर्जा गहराई में हम रहने लगे
चश्म-ए-महबूबा में उतरे तो ये अंदाज़ा हुआ
बहर-ए-बे-पायाँ की गहराई में हम रहने लगे
शा'इरी भी है कहीं ज़ख़्म-ए-तमन्ना का 'इलाज
इस लिए भी ख़ामा-फ़रसाई में हम रहने लगे
आँखों में दिल में जिगर में रूह में पहले ही थे
यूँ हुआ अब उस की अंगड़ाई में हम रहने लगे
हिज्र-ए-महबूबा में 'अमजद' जीना मुश्किल हो गया
कितनी कुल्फ़त कितनी कठिनाई में हम रहने लगे
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