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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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साँस का उखड़ जाना ग़म की इब्तिदा होगी

सय्यद अरक़म बुख़ारी

साँस का उखड़ जाना ग़म की इब्तिदा होगी

सय्यद अरक़म बुख़ारी

MORE BYसय्यद अरक़म बुख़ारी

    साँस का उखड़ जाना ग़म की इब्तिदा होगी

    उन की दीद ही मेरे दर्द की दवा होगी

    जानते हो माज़ी हम क्यूँ नहीं परखते हैं

    जानते हैं इंसाँ हैं कोई तो ख़ता होगी

    ज़िंदगी का हर रस्ता मौत से ही मिलता है

    मौत आने से ही तो ज़िंदगी 'अता होगी

    हम गुनाहों का या-रब ए'तिराफ़ करते हैं

    हश्र में तो रहमत की हम पे भी घटा होगी

    जब मुनाफ़िक़त दुनिया में 'उरूज पर है तो

    हक़-परस्त लोगों की फिर कहाँ जगह होगी

    मुस्तक़िल कोई भी तो साथ दे नहीं सकता

    रूह भी बदन से तो एक दिन जुदा होगी

    सर-फिरों से रौनक़ है उन के बा'द क्या होगा

    कूचा-ए-मोहब्बत में ख़ाक जा-ब-जा होगी

    हर कोई यहाँ ख़ुद को पारसा समझता है

    ऐसे में भला 'अर्क़म' तेरी क्या जगह होगी

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