मोहब्बत होगी मोहताज-ए-बयाँ जब हम नहीं होंगे
मोहब्बत होगी मोहताज-ए-बयाँ जब हम नहीं होंगे
न समझेगा कोई दिल की ज़बाँ जब हम नहीं होंगे
हमारी उँगलियाँ हैं नब्ज़-ए-एहसासात-ए-इम्काँ पर
यक़ीं पर वह्म का होगा गुमाँ जब हम नहीं होंगे
अभी तो सब ने गर्द-ए-कारवाँ ही हम को समझा है
हमें ढूँडेंगे अहल-ए-कारवाँ जब हम नहीं होंगे
निशाँ मंज़िल का क्या मंज़िल भी गुम होगी धुँदलकों में
चराग़-ए-रह-गुज़र देंगे धुआँ जब हम नहीं होंगे
वतन के चप्पे चप्पे पर कुछ ऐसी यादगारें हैं
हमारी दास्ताँ होगी यहाँ जब हम नहीं होंगे
मोहब्बत के हसीं ख़्वाबों की ता'बीरें हमीं तक हैं
बहुत से ख़्वाब होंगे राएगाँ जब हम नहीं होंगे
हमें बर्बाद करने से ये पहले सोचना होगा
तुम्ही पर तो उठेंगी उँगलियाँ जब हम नहीं होंगे
हमारी ख़ामुशी को अपनी हद से तो गुज़रने दो
बनेगी बे-ज़बानी भी ज़बाँ जब हम नहीं होंगे
छिड़क कर ख़ून-ए-दिल हम ने गुलिस्ताँ को निखारा है
हमें रोएगा बरसों बाग़बाँ जब हम नहीं होंगे
हमारे बा'द अक्सर दा’वत-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र देंगी
हमारे ज़ेहन की परछाइयाँ जब हम नहीं होंगे
हमीं पर ख़त्म है ऐ 'जोश' शिद्दत बर्क़-ओ-बाराँ की
न होगा इंक़िलाब-ए-आसमाँ जब हम नहीं होंगे
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