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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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कोई मसर्रत पल-दो-पल की मोहलत से मिल जाती है

साहिल सहरी

कोई मसर्रत पल-दो-पल की मोहलत से मिल जाती है

साहिल सहरी

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    कोई मसर्रत पल-दो-पल की मोहलत से मिल जाती है

    और मुसीबत जब मिलती है फ़ुर्सत से मिल जाती है

    उस के आगे सर ही झुकाना है तो सर बे-लौस झुका

    जन्नत-वन्नत तो माँ बाप की ख़िदमत से मिल जाती है

    फेंक ये बस्ता फाड़ किताबें छोड़ पढ़ाई क्रिकेट खेल

    डिग्री की क्या फ़िक्र कि डिग्री रिश्वत से मिल जाती है

    दौलत के बल-बूते पर ख़ुद को दानिश-वर मत समझो

    दौलत लाटों बोरों को भी क़िस्मत से मिल जाती है

    कुछ तो हम अश'आर अनोखे कहते हैं 'साहिल-‘सहरी

    और हमें कुछ दाद हमारी शोहरत से मिल जाती है

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