यूँ चुपके चुपके किसी से मिला नहीं करते
यूँ चुपके चुपके किसी से मिला नहीं करते
किसी के साथ भी हरगिज़ बुरा नहीं करते
हर एक बात पे करते हो क्यूँ शिकायत तुम
मोहब्बतों के सफ़र में गिला नहीं करते
चलो जहाँ में ये पैग़ाम 'आम करते हैं
वफ़ा के बदले किसी से जफ़ा नहीं करते
मुझे तो हो गई 'आदत तुझे सताने की
सो बात बात पे यूँ दिल बुरा नहीं करते
कोई भी काम करो तुम बड़ी शु'ऊरी से
किसी तरह की कहीं पर ख़ता नहीं करते
ये सोच कर ही फ़क़त डर रहा था हिजरत से
बिछड़ के 'इश्क़ में 'आशिक़ जिया नहीं करते
ख़ुदा के फ़ज़्ल से पाया है मर्तबा ये 'अज़ीम'
किसी को देख के ऐसे जला नहीं करते
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