हिज्र की शब में तिरी याद का तारा चमका
हिज्र की शब में तिरी याद का तारा चमका
रूह-ए-वीराँ में कोई दर्द पुराना चमका
मतला'-ए-'इश्क़ पे एहसास की किरनों को लिए
इक हसीं चाँद सर-ए-बाम-ए-तमन्ना चमका
कौन आया है मिरे दिल में सदा की सूरत
किस की आहट का मिरे कान में नग़्मा चमका
सोच कर ये कि अकेला है ख़ुनक रात का चाँद
साथ देने को ये दिल दर्द का मारा चमका
आज आँखों में कुछ ऐसे तिरा पैकर उतरा
जैसे तारीक जज़ीरों पे सवेरा चमका
वो है गो दूर मिरी आँख से 'ख़ालिद' लेकिन
याद के सहन में उस शोख़ का वा'दा चमका
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