दिल बता कौन सा क़ुदरत का करिश्मा देखूँ
दिल बता कौन सा क़ुदरत का करिश्मा देखूँ
चाँद देखूँ या उसे छत पे टहलता देखूँ
काश तक़दीर वो लम्हा भी मयस्सर कर दे
आइना बन के मैं जब उस का सँवरना देखूँ
किस से हासिल हुई तहज़ीब की दौलत तुझ को
तेरी पोशाक को देखूँ तिरा लहजा देखूँ
फ़िक्र बच्चों कि मुझे जब भी परेशान करे
बे-ज़बाँ उड़ते परिंदों का 'अक़ीदा देखूँ
फूल खिलने का नज़ारा तो सभी करते हैं
मेरी ख़्वाहिश है कि ख़ुशबू को बिखरता देखूँ
जिस ने लोगों की हक़ीक़त को समझ रक्खा है
बस उसी शख़्स को दुनिया में अकेला देखूँ
मुझ को किरदार की खेती के समर दिखला दे
इतना ख़ाली मैं नहीं हूँ तिरा शजरा देखूँ
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