तुम अपने आप में ऐसा करो इक राहबर पैदा
तुम अपने आप में ऐसा करो इक राहबर पैदा
करे अपने तदब्बुर से नई जो रहगुज़र पैदा
तुम्हारे वास्ते भी कोई कोह-ए-तूर जल जाता
वही ज़ौक़-ए-तजस्सुस तुम भी कर लेते अगर पैदा
तुम्हारी इक सदा पर कोह टुकड़े टुकड़े हो जाए
करो तो हौसला ऐसा करो ऐसा जिगर पैदा
अगर तुम जल्वा-ए-महबूब के मुश्ताक़ बनते हो
तो है ये शर्त कर लो दीद के क़ाबिल नज़र पैदा
असीरान-ए-क़फ़स ख़ाली दु'आ से कुछ नहीं होगा
करो ज़ंजीर की आवाज़ से ज़िंदाँ में दर पैदा
चमन वाले इसी को नाम देते हैं तरक़्क़ी का
जहाँ खिलते थे पहले फूल होते हैं शरर पैदा
हमारे फ़िक्र-ओ-फ़न की भी कोई क़ीमत हो दुनिया में
ख़ुदावंदा अगर कर दे कोई बालिग़-नज़र पैदा
किसी के दिल तड़पने की ख़बर तुम बा'द में पूछो
करो ऐ 'नूर' अपनी आह में पहले असर पैदा
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