चली है आरज़ू-ए-दिल शिकस्ता-पा अभी ठहरो
चली है आरज़ू-ए-दिल शिकस्ता-पा अभी ठहरो
निकल आएँगे 'उन्वान-ए-जुनूँ-आसा अभी ठहरो
अभी ठहरो कि हम अर्ज़-ए-यक़ीं पर ख़ुश-गुमाँ आबाद
ज़रा बर्बाद हो जाएँ ख़िरद-मंदा अभी ठहरो
फ़लक से गुफ़्तुगू करने के मौसम लौट आएँगे
ख़िज़ाँ-परवर ज़माना गुल खिलाएगा अभी ठहरो
नज़र ख़ीरा हुई फ़ानूस-ए-हैरत की शु'आ'ओं से
ख़िरद साकित क़दम ज़ंजीर हैं गोया अभी ठहरो
क़साइस की फ़सीलों में हक़ीक़त क़ैद है लेकिन
लगा है जा-ब-जा अफ़्सानवी पहरा अभी ठहरो
तग़य्युर 'ऐन-ए-फ़ितरत है मगर मजबूर हूँ ऐ दिल
गिरफ़्तार-ए-तख़य्युल है कोई लम्हा अभी ठहरो
जहाँ 'उजलत बरतनी थी वहाँ ताख़ीर की 'सलमान'
अबद का फ़ासला है अब तो कुछ 'अर्सा अभी ठहरो
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