न तो कारवाँ की तलाश है न तो राहबर की तलाश है
रोचक तथ्य
“न तो कारवाँ की तलाश है” मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी का लिखा हुआ एक प्रसिद्ध गीत है। इस गीत को 1960 में रिलीज़ हुई बॉलीवुड फ़िल्म बरसात की रात का हिस्सा बनाया गया, जहाँ इसे क़व्वाली के रूप में पेश किया गया। इसका संगीत रोशन ने तैयार किया था, जबकि मन्ना डे, आशा भोसले, सुधा मल्होत्रा, एस. डी. बातिश और मोहम्मद रफ़ी ने अपनी आवाज़ दी। बाद में इस गीत के मुखड़े का इस्तेमाल 2026 की फ़िल्म “धुरंधर” में भी किया गया।
न तो कारवाँ की तलाश है न तो राहबर की तलाश है
मेरे शौक़-ए-ख़ाना-ख़राब को तेरी रह-गुज़र की तलाश है
मेरे ना-मुराद जुनून का है 'इलाज कोई तो मौत है
जो दवा के नाम पे ज़हर दे उसी चारा-गर की तलाश है
तेरा 'इश्क़ है मेरी आरज़ू तेरा 'इश्क़ है मेरी आबरू
तेरा 'इश्क़ मैं कैसे छोड़ दूँ मेरी 'उम्र भर की तलाश है
दिल 'इश्क़ जिस्म 'इश्क़ है और जान 'इश्क़ है
ईमान की जो पूछो तो ईमान 'इश्क़ है
तेरा 'इश्क़ मैं कैसे छोड़ दूँ मेरी 'उम्र भर की तलाश है
वहशत-ए-दिल रसन-ओ-दार से रोकी न गई
किसी ख़ंजर किसी तलवार से रोकी न गई
'इश्क़ मजनूँ की वो आवाज़ है जिस के आगे
कोई लैला किसी दीवार से रोकी न गई
ये 'इश्क़ 'इश्क़ है
वो हँस के अगर माँगे तो हम जान भी दे दें
ये जान तो क्या चीज़ हैं ईमान भी दे दें
'इश्क़ आज़ाद है हिंदू न मुसलमान है 'इश्क़
आप ही धर्म है आप ही ईमान है 'इश्क़
जिस से आगाह नहीं शैख़-ओ-बरहमन दोनों
उस हक़ीक़त का गरजता हुआ ए'लान है 'इश्क़
'इश्क़ न पूछे दीन धर्म नूँ 'इश्क़ न पूछे ज़ाताँ
'इश्क़ दे हथ्थों गर्म लहू विच डुबियाँ लख बराताँ
ये 'इश्क़ 'इश्क़ है
जब जब कृष्ण की बंसी बाजी निकली राधा घर से
जान अंजान का भेद भुला के लोक लाज को तज के
बन बन डोली जंक दुलारी पहन के प्रेम की माला
दर्शन जल की प्यासी मीरा पी गई विष का प्याला
ये 'इश्क़ 'इश्क़ है
अल्लाह और रसूल का फ़रमान 'इश्क़ है
या'नी हदीस 'इश्क़ है क़ुरआन 'इश्क़ है
गौतम का और मसीहा का अरमान 'इश्क़ है
ये काइनात 'इश्क़ है और जान 'इश्क़ है
'इश्क़ सरमद 'इश्क़ ही मंसूर है
'इश्क़ मूसा 'इश्क़ कोह-ए-नूर है
ख़ाक को बुत और बुत को देवता करता है 'इश्क़
इंतिहा ये है कि बंदे को ख़ुदा करता है 'इश्क़
ये 'इश्क़ 'इश्क़ है
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