इंतज़ार हुसैन के फ़न में इंसान के अंदर का जानवर: वुजूदी और नैतिक पतन का तमसीली (रूपकात्मक) बयान
इंतज़ार हुसैन ने अपने दूसरे दौर में इंसान के रूहानी पतन, हवस और जिबिल्ली (मूल प्रवृत्ति के) दबाव को तमसीलों (रूपकों) और पौराणिक प्रतीकों के ज़रिए पेश किया है, जहाँ इंसान बंदर, कुत्ते या मक्खी में तब्दील हो जाता है।