वली दकनी और उर्दू का शुरुआती सफ़र: फ़ारसी के साये से निकलने की जिद्द-ओ-जहद (कोशिश)
यह लेख उर्दू ज़बान के शुरुआती दौर की नफ़्सियाती कश्मकश (मानसिक उलझन), फ़ारसी के दबदबे और वली दकनी की शायरी के उस इंक़िलाबी (क्रांतिकारी) असर का जायज़ा लेता है जिसने उर्दू को एक बा-क़ायदा अदबी (साहित्यिक) ज़बान का दर्जा दिलाया।