अक़्ल बनाम जुनून: ग़ालिब का शेरी मिज़ाज और मीर से तुलना
शायरी में आमतौर पर 'जुनून' को अक़्ल पर तरजीह दी जाती है, लेकिन ग़ालिब की शायरी एक ऐसे होश-मंद इंसान की शायरी है जिसने जज़्बाती होने के बजाए अक़्ल और फ़िक्री मुशाहिदे (वैचारिक अवलोकन) को अपना तरीक़ा बनाया।