हिज्र पर दोहे
अगर आप हिज्र की हालत
में हैं तो ये शायरी आप के लिए ख़ास है। इस शायरी को पढ़ते हुए हिज्र की पीड़ा एक मज़ेदार तजुर्बे में बदलने लगेगी। ये शायरी पढ़िए, हिज्र और हिज्र ज़दा दिलों का तमाशा देखिए।
आँखों के दर बंद थे क़ैद थे सब लम्हात
उस के दिल के शहर में गुज़री फिर इक रात