आर्ट, भावुकता और कैथार्सिस: हम अश्लील और महान कला में फ़र्क़ कैसे करें?
आर्ट का मक़सद सस्ती-जज़्बातियत (भावुकता) या हवस उभारना नहीं बल्कि जज़्बात का कैथार्सिस करके इंसान को तवाज़ुन (संतुलन), सुकून और जमालियाती-तहय्युर (सौंदर्यपरक आश्चर्य) देना है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
आर्ट का मक़सद सस्ती-जज़्बातियत (भावुकता) या हवस उभारना नहीं बल्कि जज़्बात का कैथार्सिस करके इंसान को तवाज़ुन (संतुलन), सुकून और जमालियाती-तहय्युर (सौंदर्यपरक आश्चर्य) देना है।